सपनों की दुनिया

ये सपनो की दुनिया कितनी अजीब होती है
झूठी ही सही पर हर खुशी नसीब तो होती है बेशक आते हैं सपने कुछ पलों के लिए 
पर इन पलों में जन्नत कितनी करीब होती है !
जिदंगी मे दुनिया को जानकर भी अनजानी सी बनती आई हूँ । सब कुछ खबर रखते हुए भी बेखबर बनती आई हूँ !
परवाह होते हुए भी सबकी नजरों में बेपरवाह सी बनती आई हूँ !
 दिल चाहता है इक नई शुरुआत करू , हमेशा कुछ नया करने का सोचती हूँ पर कुछ भी नया शुरू करने से पहले बस कल्पनाओं मे खो जाती हूँ , जो मैं जानती हूँ कि बहुत अलग और शायद थोड़ा अजीब सा भी है पर ये कल्पनायें ही अब मेरी जिंदगी बन गई है ! जिदंगी इसी वजह से हकीकत से दूर होती जा रही है ! हर पल बस कल्पना ही सच लगती है ! मैं जानती हूँ कि मेरी इन बेबुनियाद कल्पनाओं की वजह से ही हमेशा जिदंगी मे मुझसे खूब गलतियां हो जाती है! सबके दिल को शायद इससे ठेस भी पहुंचती है क्योंकि इन कल्पनाओ की वजह से मैं हकीकत से दूर चली जाती हूँ ! वास्तविक जिदंगी से दूर सपनों में कहीं खो जाती हूँ जो शायद कोई भी नहीं चाहता है ! जिस पल कुछ नया करने का ख्याल दिल में आता है उस पल में ही एक नई कल्पना आकार ले लेती है ! आज शायद ये लिखते हुए भी दिल दिमाग में कईं नईं कल्पनायें आकार ले रही है , जिनका हकीकत से कोई सरोकार नहीं है पर फिर भी बस सोचती जा रही हूँ कल्पना करती जा रही हूँ और जो दिल कह रहा है वह लिख रही हूँ ! ये तो नहीं जानती हूँ कि ये कल्पनायें मेरी जिंदगी को किस मोड़ पर ले जायेगी ! कभी कभी तो इतना खो जाती हूं कि अपनी मंजिल के रास्ते मेरी नजरो मे घूमने लग जाते है लेकिन ज्योंही कदम बढाने लगती हूं तो न जाने रास्ते भी कहीं खो जाते है ! अगर हकीकत में उन रास्तों पर कदम बढाने का सोचूं भी तो वे रास्ते कहीं नजर नहीं आते है, जबकि मैं जानती हूँ कि वे सभी रास्ते मेरी जिंदगी में मौजूद है…..!

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