जब जब सोचती हूं प्यार के बारे में,
तेरा ही चेहरा नजर आता है
सब कुछ है पास मेरे पर जाने क्यों,
बिना तेरे सब खाली खाली सा लगता है
जानती नहीं हूं अभी प्यार के मायने,
पर फिर भी तेरा ही ख्याल आता है,
शायद यह दिल तुझको ही चाहता है।
कैसे कहूं कि प्यार है तुझसे,
दिल धड़कता है हर लम्हा तेरे लिए,
कहने को बहुत कुछ कहना है तुझसे,
पर जाने क्या सोचकर दिल रुक जाता है ।
कहने की कोशिशें भी की है शायद कई,
ना जाने क्यों हर पल मायूसी छा जाती है,
शायद जुबां पर ना आए आ पाए बात कभी,
लिख रही हूं अपने दिल की दास्तां ,
इन कागज के कोरे पन्ने पर ,
शायद किस्मत ने तुम तक पहुंचा दे,
और तुम्हें मुझसे इस कदर मिला दे।
कि जैसे मेरे हर किस्से में हो तुम,
वैसे मेरी जिंदगी के हर हिस्से में भी हो तुम
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