राह और मंजिल

ये सोच कर न रुक जाना राही

कि मंज़िल कब आएगी

तू बस चलते जाना मंज़िल मिल ही जाएगी !

ख़ुशी जो संग राह में दिल क्यों फिर उदास हो

रास्ता ये कट जाये यूँ ही मन में मंजिल की आस हो !

रब जो साथ है फिर कैसा डर है

तू चलता जा राही मंज़िल भी पास है !

खुशियों के संग ये वक्त यूँ ही कट जाए

हर पल हर मोड़ पर खुशी तेरे साथ हैं !

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